Panchkone Hindi Novel #Upnayas

सिम्मी हर्षिता की कहानियाँ कथ्य की दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण हैं ही किंतु वे कथन-भंगिमा की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण और आकर्षक हैं। वे इस कौशल से कहानी कहती हैं कि कहीं भी अति नहीं होती। इन कहानियों को उनकी कथन-भंगिमा और  अच्छे गद्य के लिए भी पढ़ा जा सकता है। अच्छा गद्य लिखना आसान काम नहीं है। इसलिए तो ‘गद्यं कवीना निकषं’ कहा गया है। उनके गद्य में काव्यात्मकता है और यहाँ से वहाँ तक प्रसृत वाग्वैदग्ध्य है, जिसमें परिहास भी है और व्यंग्य भी। उनके गद्य में एक क्रीडा-भाव सर्वत्र विद्यमान है। यह क्रीडा-भाव कहानियों के पात्रों के प्रति भी है और भाषा के प्रति भी।
—डॉ. हरदयाल

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#HindiFiction #HindiAuthor #newrelease #hindinovel

#सिम्मीहर्षिता के अब तक लिखे गए उपन्यास मध्यवर्ग के थे। उन्होंने कहानियाँ जरूर सभी वर्गों पर लिखीं, पर उपन्यास निम्न वर्ग से वंचित रहा। प्रस्तुत उपन्यास ‘पंचकोण’ निम्न वर्ग के कथ्य पर केंद्रित है, जो गाँव से शहर आए लोगों की मानसिकता और संघर्ष और उनकी समस्याओं को उजागर करता है।
उपन्यास की मुख्य पात्र रानी, उसका पति जानी और उसका पिता है। ससरू गाँव और शहर दोनों जगह पितृसत्ता का प्रतीक है और वह हर घटना का सूत्रधार है। और भी बहुत से पात्र हैं, जिससे उपन्यास में एक टकराव और संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।


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PANCHKONE NOVEL


ख्यातिलब्ध कथाकार एवं संपादक शानी अकसर कहते थे—हिंदी के रचनाकार मुसलिम पात्रों को प्रायः अनदेखा करते हैं। इस उपन्यास में तो चेन्नई के निकट के गाँव के मुसलिम पात्र हैं। वे दिल्ली में आकर रोजी-रोटी के संघर्ष में जूझते हैं। उनके जीवन में एक नई तरह की उथल-पुथल जन्म लेती है। अतएव गाँव और दिल्ली जैसे महानगर का टकराव भी पाठक के सामने आता है।
कहना न होगा कि सिम्मी हर्षिता का चीजों को देखने का नजरिया अपने समकालीन कथाकारों से अलग और विशिष्ट है—ये सब चाहे बस-यात्रा करती लड़कियों की दुश्चिंता हो या प्रेमी-प्रेमिकाओं के अंतर्संबंधों का वर्णन। अधिक क्या? ‘पंचकोण’ का कथा-रस पाठक को अंत तक बाँधे रखता है—एक विचलन से भरता हुआ।
—मजीद अहमद

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New Books Published

Simmi Harshita Ki Lokpriya Kahaniyan

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http://www.prabhatbooks.com/simmi-harshita-ki-lokpriya-kahaniyan.htm

 

Simmi Harshita : Chunee Hui Kahaniyan

सिम्मी हर्षिता : चुनी हुई कहानियाँ

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http://www.amanprakashan.com/books.php?id=287#

 

Praise for the books

‘तुम्हारी भाषा अद्भुत है। तुम्हारी शैली अद्भुत है।’
—मन्नू भंडारी

सिम्मी हर्षिता की हर कहानी अपने आप में संपूर्णता का एहसास लेकर आती है। सुधी पाठक केवल कहानी पढ़ता ही नहीं है, उसकी हर स्थिति के साथ अपना तादात्म्य स्थापित करता है। सिम्मी हर्षिता की कहानी पढ़ना ऐसा है, जैसे ठंडे शर्बत को एक-एक घूँट पीना और हर घूँट के साथ उसका स्वाद लेना।
—डॉ. महीप सिंह

‘बनजारन हवा’ कहानी में तुमने भाषा का बहुत ही प्रभावी रूप प्रयोग किया है।
—राजेंद्र यादव

सिम्मी हर्षिता की कहानियाँ कथ्य की दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण हैं ही किंतु वे कथन-भंगिमा की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण और आकर्षक हैं। वे इस कौशल से कहानी कहती हैं कि कहीं भी अति नहीं होती। इन कहानियों को उनकी कथन-भंगिमा और  अच्छे गद्य के लिए भी पढ़ा जा सकता है। अच्छा गद्य लिखना आसान काम नहीं है। इसलिए तो ‘गद्यं कवीना निकषं’ कहा गया है। उनके गद्य में काव्यात्मकता है और यहाँ से वहाँ तक प्रसृत वाग्वैदग्ध्य है, जिसमें परिहास भी है और व्यंग्य भी। उनके गद्य में एक क्रीडा-भाव सर्वत्र विद्यमान है। यह क्रीडा-भाव कहानियों के पात्रों के प्रति भी है और भाषा के प्रति भी।
—डॉ. हरदयाल

Simmi Harshita 

जन्म : 29 नवंबर, 1940, रावलपिंडी के निकट देवी (अविभाजित भारत)।
शिक्षा : हिंदी तथा समाजशास्त्र में एम.ए.।
व्यवसाय : लंबे अरसे तक अध्यापन से जुड़े रहने के बाद अब स्वतंत्र लेखन।
पहली कहानी ‘अपने-अपने दायरे’ 1969 में ‘संचेतना’ पत्रिका में प्रकाशित।
प्रकाशित कृतियाँ : कमरे में बंद आभास, धराशायी, तैंतीस कहानियाँ (पुरस्कृत), बनजारन हवा, इस तरह की बातें, प्रेम संबंधों की कहानियाँ, सिम्मी हर्षिता की लंबी कहानियाँ, चुनी हुई कहानियाँ।
उपन्यास : संबंधों के किनारे, यातना शिविर, रंगशाला, जलतरंग (पुरस्कृत)।
प्रथम दोनों उपन्यासों के पंजाबी में अनुवाद प्रकाशित—संबंधां दे कंडे-कंडे तथा तसीहेघर।
मेरे साक्षात्कार तथा कृति विमर्श।
विभिन्न  कृतियों  पर  एम.फिल.  तथा
पी-एच.डी., 1983 के विश्वपंजाबी लेखक सम्मेलन बैंकॉक (थाइलैंड) में भागीदारी।
विभिन्न कहानियों पर दूरदर्शन के लिए टेलीफिल्म का निर्माण।
सम्मान-पुरस्कार : पंजाब भाषा विभाग द्वारा वर्ष 1997 के श्रेष्ठ कथा-साहित्य के लिए ‘33 कहानियाँ’ संग्रह पुरस्कृत; हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा वर्ष 2006 का साहित्यकार सम्मान; उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2006 का सौहार्द सम्मान तथा ‘जलतरंग’ उपन्यास के लिए 2014 का कुसुमांजलि साहित्य सम्मान।

#SambhandoKeKinare by Simmi Harshita

सम्बन्धों के किनारे
सम्बन्धों के किनारे by सिम्मी हर्षिता

सिम्मी हर्षिता has just released her new book सम्बन्धों के किनारे 

 Sambhando Ke Kinare is the latest release by  www.amanprakashan.com

You can order your copy from here सम्बन्धों के किनारे

 

 

सम्बन्धों के किनारे
सम्बन्धों के किनारे by सिम्मी हर्षिता

सम्बन्धों के किनारे
सम्बन्धों के किनारे by सिम्मी हर्षिता

 

Simmi Harshita

Simmi Harshita

जन्म : 29 नवंबर, 1940, रावलपिंडी के निकट देवी (अविभाजित भारत)।
शिक्षा : हिंदी तथा समाजशास्त्र में एम.ए.।
व्यवसाय : लंबे अरसे तक अध्यापन से जुड़े रहने के बाद अब स्वतंत्र लेखन।
पहली कहानी ‘अपने-अपने दायरे’ 1969 में ‘संचेतना’ पत्रिका में प्रकाशित।
प्रकाशित कृतियाँ : कमरे में बंद आभास, धराशायी, तैंतीस कहानियाँ (पुरस्कृत), बनजारन हवा, इस तरह की बातें, प्रेम संबंधों की कहानियाँ, सिम्मी हर्षिता की लंबी कहानियाँ, चुनी हुई कहानियाँ।
उपन्यास : संबंधों के किनारे, यातना शिविर, रंगशाला, जलतरंग (पुरस्कृत)।
प्रथम दोनों उपन्यासों के पंजाबी में अनुवाद प्रकाशित—संबंधां दे कंडे-कंडे तथा तसीहेघर।
मेरे साक्षात्कार तथा कृति विमर्श।
विभिन्न  कृतियों  पर  एम.फिल.  तथा
पी-एच.डी., 1983 के विश्वपंजाबी लेखक सम्मेलन बैंकॉक (थाइलैंड) में भागीदारी।
विभिन्न कहानियों पर दूरदर्शन के लिए टेलीफिल्म का निर्माण।
सम्मान-पुरस्कार : पंजाब भाषा विभाग द्वारा वर्ष 1997 के श्रेष्ठ कथा-साहित्य के लिए ‘33 कहानियाँ’ संग्रह पुरस्कृत; हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा वर्ष 2006 का साहित्यकार सम्मान; उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2006 का सौहार्द सम्मान तथा ‘जलतरंग’ उपन्यास के लिए 2014 का कुसुमांजलि साहित्य सम्मान।

 

Published Books.

Just sharing the covers of a few of

Simmi Harshita’s books.

Two new ones have been published recently and will be shared on this blog soon.

Will be posting the details and links too.

Simmi Harshita Ki Lambi Kahaniya
Simmi Harshita Ki Lambi Kahaniya

Prem Sambhando Ki Kahaniya
Prem Sambhando Ki Kahaniya

Rangshalla
Rangshalla

Yatna Shivar
Yatna Shivar

33 Kahaniya
33 Kahaniya

Jaltarang
Jaltarang

Is Tarah Ki Baatien
Is Tarah Ki Baatien

Banjaran Hawa
Banjaran Hawa

Kamre Me Band Abhas
Kamre Me Band Abhas

Dharashai
Dharashahi

A place for Simmi Harshita’s words, works, thoughts, dedication & efforts.

My author picture on my books.
My author picture on my books.

Simmi Harshita
Simmi Harshita

First story “Apne Apne Daire” published in “Sanchetna Magazine” in 1969.
First Story Collection “Kamre me Bandh Aabash” published in 1975.
Novel “Dharashai” in 1980.
Novel “Sambando Ke Kinare” in 1984.
Novel ” Yataana Shivar” in 1990.
Story Collection “Tentees Kahaniya” in 1996.
Novel “Banjaran Hawa” in 2000.
Novel “Rangshalla” in 2003.
Novel “Is Taraha Ki Baaten” in 2007.
“Prem Sambandho ki Kahaniya”
Novel “Jaltarang”

Kusumajali Puruskar / Award
Kusumajali Puruskar / Award 2014